किचन वेस्ट से बनती है यह खाद
उन्होंने बताया कि किचन से जो भी वेस्ट निकलता है, खासतौर पर अंडे के छिलके, उसका इस्तेमाल करें. आपको सबसे पहले गार्डन में एक छोटा सा एरिया बना लेना है. उसमें थोड़ा सा गोबर खाद डाल दीजिए और खासतौर पर इस्तेमाल की हुई चायपत्ती, जो किचन से दिन में तीन से चार बार निकलती है, उसे चार-पांच दिन तक लगातार डालते रहिए. ठंड के दिनों में अगर अंडे खाते हैं तो उसके छिलके भी डालिए.
छिलकों के साथ अलाव भी डालिए
इसके बाद आलू के छिलके, जो किचन से निकलते हैं, और प्याज के छिलके के साथ अलाव की राख भी डालिए. ये सारी चीजें आमतौर पर बेकार समझी जाती हैं, लेकिन खाद बनाने में बहुत काम आती हैं. ऐसा नहीं है कि एक ही दिन सब कुछ डालना है. जैसे-जैसे जो निकलता जाए, वैसे-वैसे उस एरिया में डालते रहिए. आप 15-20 दिन बाद देखेंगे कि यह पूरी तरह खाद बनकर तैयार हो गई है. अब इस खाद को थोड़ा-थोड़ा पानी में मिलाकर अपने पौधों में देना शुरू करें.
कीटनाशक दवा की जरूरत भी नहीं पड़ती
दरअसल, इस ब्रह्मास्त्र खाद में पोटैशियम, कैल्शियम, जिंक, मैग्नीशियम, इम्युनिटी बूस्टर और कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो खासतौर पर पौधों की जड़ों को मजबूत करते हैं. जब पौधों की इम्युनिटी मजबूत होती है तो उनमें कीड़े भी नहीं लगते और कीटनाशक दवा की जरूरत भी नहीं पड़ती. दरअसल, कीड़े तभी लगते हैं, जब पौधा कमजोर होता है.
दिन की धूप जरूरी
इसके अलावा दिन में 6 से 7 घंटे जहां धूप लगती हो, वहां अपने सारे पौधों को रखें. पर्याप्त धूप मिलना भी बहुत जरूरी है. पानी भी ज्यादा न डालें, क्योंकि लोग अक्सर यही गलती करते हैं. पाइप से बहुत ज्यादा पानी डाल देते हैं. आपको एक पौधे में लगभग आधा गिलास पानी ही देना है. बस खाद और इन बातों का ध्यान रखें और फिर देखिए, आपकी बगिया में रंग-बिरंगे फूल कैसे खिलते हैं.
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