Jharkhand Politics JMM – Congress tension: झारखंड की राजनीति में इन दिनों एक अजीब सी खामोशी है.सत्ता की कुर्सी साझा है, लेकिन सियासी सम्मान पर सवाल खड़े हो रहे हैं. सहयोगी दलों के बीच बढ़ती तल्खी ने यह चर्चा तेज कर दी है कि क्या गठबंधन सिर्फ संख्या का खेल रह गया है या रिश्तों में दरार गहरी हो चुकी है?
झारखंड की राजनीति में झामुमो बनाम कांग्रेस के बीच शीत युद्ध ने बढ़ाई सियासी गर्मी
बार-बार अपमानित हो रही कांग्रेस!
झारखंड की राजनीति को करीब से जानने वाले जानकारों की नजर में हालत यह है कि मुख्य सत्ताधारी दल अपने ही सत्ता में सहयोगी कांग्रेस पर कई सवाल खड़े कर रहा है. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने निकाय चुनाव के बीच अपने ही सहयोगी दल कांग्रेस पर आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज करने की मांग की थी. वहीं, बीते दिनों कांग्रेस के पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक की गिरफ्तारी भी प्रशासन द्वारा की गई.
निकाय चुनाव से गिरफ्तारी तक कांग्रेस क्यों असहज?
सवाल यह उठने लगे कि आखिर इस सरकार में कांग्रेस किस परिस्थितियों में है कि खुद के ही सरकार में खुद के ही पूर्व विधायकों की गिरफ्तारी हो रही है. जानकारों की नजर में स्थति यह हो गई कि बड़कागांव से पूर्व विधायक अंबा प्रसाद के पिता, पूर्व मंत्री योगेंद्र साव की गिरफ्तारी पर झारखंड कांग्रेस को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्हें छुड़ाने की मांग करनी पड़ी. पिछले कुछ दिनों में कई ऐसे मामले आए हैं जिससे यह प्रतीत होता है कि अपने ही सरकार में कांग्रेस बेबस है.
पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस और झामुमो के बीच संबंध:
1. निकाय चुनाव में कांग्रेस गठबंधन के साथ चुनाव लड़ना चाह रही थी, लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कांग्रेस को भाव नहीं देते हुए निकाय चुनाव में अपने समर्थित उम्मीदवार उतारे.रांची से कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार राम खालको ने कहा था कि मुख्यमंत्री से बात हुई थी और उन्होंने समर्थन देने का आश्वासन दिया था. पर हालात बदल गए.
2. विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के सीनियर लीडर्स कई बार मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगते हैं, पर उन्हें समय नहीं मिल पाता है.
3. न्यूज 18 से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि वह दूसरे नेताओं की तरह विदेश में जाकर देश की बुराई नहीं करते.
4. कांग्रेस के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव की गिरफ्तारी पर कांग्रेस को अपनी ही सरकार से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह मांग करनी पड़ी कि उनके नेता को गिरफ्तार न किया जाए.
5. झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने प्रेस वार्ता कर कांग्रेस पर आचार संहिता उल्लंघन करने का मामला दर्ज करने की मांग रखी.
झामुमो संग गठबंधन पर उठे सवाल
इन घटनाक्रम पर झारखंड कांग्रेस के उप नेता राजेश कश्यप ने कहा कि हम लोग गठबंधन में साथ हैं. कई बार कम्युनिकेशन गायब होता है, तो हम लोग मुख्यमंत्री से बात करने का प्रयास करेंगे. उनकी व्यवस्था अधिक है, इस वजह से हो सकता है यह परेशानी आ रही हो. वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक अनंत प्रताप देव ने कहा कि यह पूरा मामला आलाकमान का है और आलाकमान जो फैसला लेगी, हम लोग उनके साथ होते हैं.
सहयोगी ही बने चुनौती, कांग्रेस की बढ़ी मुश्किल
इस पूरे मामले पर कांग्रेस का अब भी मानना है कि गठबंधन में सब कुछ ठीक चल रहा है. झारखंड कांग्रेस के प्रवक्ता सोनल शांति ने कहा है कि हम लोग गठबंधन के साथी हैं, हम लोग प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं. अगर झामुमो को लगता है कि हमारे प्रत्याशी ने कुछ गलत किया है तो वह चुनाव आयोग जा सकते हैं. जहां तक योगेंद्र साव की गिरफ्तारी की बात है, उन्होंने जनता की आवाज उठाई थी. झारखंड में गठबंधन के सहयोगियों को ही आवाज उठानी पड़ रही है क्योंकि राज्य में विपक्ष नदारद है.
झारखंड में दोस्ती की बात और दबाव की राजनीति
पिछले कुछ दिनों से चल रहे झामुमो-कांग्रेस के बीच शीत युद्ध पर झारखंड बीजेपी के प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने कहा कि गठबंधन के सहयोगियों के प्रति इन लोगों के मन में कोई भाव नहीं है. चुनाव के बीच जिन लोगों की दूरियां इतनी बढ़ चुकी हैं कि यह दूसरे पर टीका टिप्पणी कर रहे हैं. अब तो राज्य के लोग भी सवाल उठा रहे हैं. हालांकि, फिलहाल दोनों दल बयानबाजी में संयम बरत रहे हैं, लेकिन सियासी संकेत साफ हैं. अगर संवाद की कमी यूं ही बनी रही तो गठबंधन की मजबूती पर सवाल और गहरे हो सकते हैं. झारखंड की जनता अब यह देख रही है कि सत्ता की साझेदारी भरोसे पर टिकेगी या महज औपचारिकता बनकर रह जाएगी. आने वाले दिनों में आलाकमान की भूमिका तय करेगी कि यह शीत युद्ध थमेगा या सियासी तापमान और बढ़ेगा.
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