रांची स्थित ईडी कार्यालय में मारपीट के आरोपों से जुड़े मामले पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने रांची पुलिस की जांच पर तत्काल रोक लगा दी और ईडी कार्यालय की सुरक्षा CISF/BSF या किसी अर्धसैनिक बल को सौंपने का निर्देश दिया. CCTV फुटेज सुरक्षित रखने को कहा गया है. राज्य सरकार को 7 दिन और प्रतिवादी संतोष कुमार को 10 दिन में जवाब देना है. अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी.
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के गृह सचिव को इस मामले में पक्षकार (पार्टी) बनाने का निर्देश दिया है. साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी और शिकायतकर्ता संतोष कुमार को भी पक्षकार बनाने का आदेश दिया गया है. कोर्ट ने राज्य सरकार को सात दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है. जबकि संतोष कुमार को 10 दिनों के अंदर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है.
सुरक्षा में कोई कमी न रहे…
अदालत ने ईडी को यह भी सख्त निर्देश दिया है कि वह कार्यालय में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सुरक्षित रखे, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके. इसके अलावा ईडी कार्यालय की सुरक्षा को लेकर भी कोर्ट ने अहम आदेश दिए हैं. कोर्ट ने कहा है कि सीआईएसएफ, बीएसएफ या किसी भी केंद्रीय अर्धसैनिक बल को ईडी कार्यालय की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी जाए. साथ ही रांची के एसएसपी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि ईडी दफ्तर की सुरक्षा में कोई कमी न हो.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल ये पूरा मामला राजधानी रांची के एयरपोर्ट रोड स्थित ईडी कार्यालय से जुड़ा है. पेयजल और स्वच्छता विभाग के पूर्व क्लर्क संतोष कुमार ने आरोप लगाया है कि पूछताछ के लिए बुलाए जाने के दौरान ईडी के सहायक निदेशक प्रतीक और उनके सहायक शुभम ने उनके साथ मारपीट की. संतोष कुमार का दावा है कि मारपीट में उनका सिर फोड़ दिया गया और बाद में सबूत मिटाने की कोशिश भी की गई. इसके बाद उन्होंने रांची एयरपोर्ट थाने में ईडी के दो अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई.
ईडी ऑफिस पर रांची पुलिस का धाबा
एफआईआर दर्ज होने के बाद गुरुवार सुबह रांची पुलिस की एक टीम ईडी कार्यालय पहुंची और जांच शुरू की. पुलिस के साथ फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम भी मौके पर पहुंची थी. ईडी दफ्तर के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया था. हालांकि, ईडी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे साजिश बताया है. ईडी के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि संतोष कुमार को कोई समन नहीं भेजा गया था और पूछताछ के दौरान उन्होंने खुद शीशे की बोतल से अपने सिर पर चोट पहुंचाई थी. ईडी का दावा है कि इसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया और इलाज कराया गया.
राजनीतिक बयानबाजी
इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है. झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि ईडी कार्यालय पर पुलिस कार्रवाई की आड़ में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े मामलों के अहम सबूतों से छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट करने की कोशिश की जा सकती है. फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामला और भी संवेदनशील हो गया है.
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