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Cauliflower Growing Tips: बिना केमिकल के भी कैसे पांच किलो तक की पत्ता गोभी उगायी जा सकती है कोई रांची के मनोज से सीखे. मनोज ने किचन वेस्ट और केले के छिलकों से बनी खाद की मदद से यह कारनामा किया है. उन्होंने टिप्स भी दिए कि कैसे पत्तगाभी की खेती करेंगे तो अच्छी सब्जी उगेगी.
रांची. बाजार में पत्तागोभी तो आपने देखे ही होंगे. लेकिन आज हम आपको 5 किलो का पत्तागोभी दिखाने वाले हैं और खासतौर पर इसको उगाने वाले मनोज से बातचीत भी करवाएंगे और बताएंगे किस तरीके से उन्होंने बिना यूरिया और बिना किसी केमिकल के ही इतनी बढ़िया और फ्रेश पत्तागोभी उगायी है. उन्होंने बताया कि बाहर के किसी केमिकल का इस्तेमाल नहीं है, बस दो-चार बातों का ख्याल रखना है.
सबसे पहले मिट्टी का ख्याल
मनोज बताते हैं, अगर आपको चार-पांच किलो का पत्तागोभी चाहिए तो जमीन की मिट्टी काफी उपजाऊ होनी चाहिए. मतलब एकदम अच्छी गुणवत्ता की हो और उसके लिए आपको कम से कम दो से तीन बार खेत को जोतना पड़ेगा. खेत को जब जोतते हैं तो हाथों से कंघी कर दें, मतलब किसी औजार से नहीं, उंगली से ही जैसे कंघी करते हैं वैसे करके छोड़ दें और एक बार जोतने के बाद तीन-चार दिन छोड़ दें, उसे धूप लगने दें.
केले और किचन वेस्ट का खाद रामबाण है
इसी बीच खासतौर पर केले और किचन वेस्ट से जो खाद तैयार होता है, हम उसको विशेष तौर पर डालते हैं. क्योंकि केले के वेस्ट में पोटैशियम की मात्रा काफी अधिक होती है, कैल्शियम और कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जो मिट्टी की उर्वरक शक्ति को काफी बढ़ाते हैं. आपको थोड़ा सा चूना मिला देना है, जिससे पीएच स्तर संतुलित हो जाएगा. केंचुआ खाद और गोबर खाद तो देना ही है. इतनी सारी चीजें देकर हम खेत को जोतते हैं और मिट्टी तैयार करते हैं.
इसके बाद आती है पानी की बारी
इतना करने के बाद हम पानी का भी विशेष तौर पर ध्यान रखते हैं. अधिक पानी बिल्कुल भी नहीं डालना है, दो-तीन दिन में बस एक बार पानी डालना है. पानी कहीं ज्यादा जमा नहीं होना चाहिए. बीच-बीच में देखते रहिए कि कहीं खरपतवार तो नहीं उग रही है. अगर उग रही है तो आजकल बड़े आधुनिक औजार आ चुके हैं, उससे तुरंत हटा दीजिए. अगर आप इतना ही कर लेंगे तो निश्चित तौर पर आपका पत्तागोभी कम से कम तीन किलो का तो होगा ही और अच्छा हुआ तो 4 से 5 किलो तक हो जाएगा.
इसके आसपास आपको मंडराते रहना होगा
धूप पर्याप्त मात्रा में लगे, इस बात का ध्यान रखिए. हालांकि खेत में धूप की ज्यादा चिंता नहीं होती और थोड़ा घूम-घूम कर हम लोग बीच-बीच में देखते भी रहते हैं कि कोई कीड़े-मकोड़े या फिर ऊपर से पक्षी आकर फसल को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहे हैं. तो घूम-घूम कर बार-बार देखना भी काफी मेहनत का काम होता है. मतलब है कि इसके आसपास आपको लगातार ध्यान रखना पड़ेगा.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
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