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हिंदू नववर्ष के साथ 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि का आगाज़ हो रहा है. देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुद्गल के अनुसार कलश स्थापना के लिए सुबह 06:52 से 07:43 तक और दोपहर में 12:05 से 12:53 तक का श्रेष्ठ मुहूर्त है. भक्त नौ दिनों तक मां के नौ स्वरूपों की आराधना करेंगे.
देवघरः चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिंदू नववर्ष की शुरुआत मानी जाती है और इसी पावन दिन से आरंभ होता है चैत्र नवरात्रि का महापर्व. इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से कलश स्थापना कर नौ दिनों की साधना का संकल्प लेते हैं. नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. भक्तजन पूरे नौ दिन उपवास रखकर मां की आराधना करते हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु प्रतिपदा और अष्टमी के दिन विशेष व्रत रखते हैं. जिसकी जैसी श्रद्धा और क्षमता होती है, वह उसी अनुसार व्रत और पूजन करता है.
नवरात्रि की दुर्गाअष्ट्मी है बेहद खास:
नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है. दुर्गा अष्टमी और महा नवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन और भोजन कराया जाता है. इसके बाद हवन किया जाता है और विधिपूर्वक पारण कर व्रत का समापन होता है.
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य:
देवघर से प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुद्गल ने लोकल 18 को बताया कि वर्षभर में कुल चार नवरात्रि मनाई जाती हैं. दो गुप्त नवरात्रि, एक शारदीय नवरात्रि और एक चैत्र नवरात्रि. चैत्र नवरात्रि का आरंभ चैत्र माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होता है. इस दिन कलश स्थापना कर नौ दिनों तक मां के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस वर्ष प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 19 मार्च को सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर होगी और इसका समापन 20 मार्च को सुबह 04 बजकर 52 मिनट पर होगा. पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से प्रारंभ होगी. इसी शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करना विशेष फलदायी माना गया है.
कलश स्थापन का शुभ मुहूर्त:
19 मार्च को चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाएगी. सुबह में कलश स्थापना का मुहूर्त 6 बजकर 52 मिनट से लेकर 7 बजकर 43 मिनट तक है. सुबह में कलश स्थापना के लिए 50 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा. जो लोग सुबह में कलश स्थापना नहीं कर सकते हैं, वे दोपहर में अभिजीत मुहूर्त 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट के बीच कर सकते हैं. दोपहर में कलश स्थापना के लिए 48 मिनट का मुहूर्त है.
पूजा से सुख समृद्धि की होती है वृद्धि:
नवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना और शक्ति उपासना का महान अवसर है.इन नौ दिनों में भक्तजन संयम, श्रद्धा और भक्ति के साथ मां दुर्गा की आराधना करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और शक्ति की कामना करते हैं. मां की कृपा से सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इस पावन अवसर पर आप भी सच्चे मन से मां की भक्ति करें और चैत्र नवरात्रि के इस महापर्व को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाएं.
About the Author
मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
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